यह शब्द अब एक हैशटैग (#CollectorSahiba) बन चुका है, जिसका उपयोग आईएएस अधिकारियों की तारीफ में किया जाता है। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव की लड़की, जो 'कलेक्टर साहिबा' को अपने स्कूल में आते देखती है, उसकी जिंदगी बदल जाती है। यह सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि एक प्रतीक है – प्रतीक यह कि "हाँ, यह कुर्सी मेरे लिए भी है।"
एक महिला कलेक्टर को नक्सल प्रभावित इलाके में रात्रि दौरा करने से रोका गया। उन्होंने कहा, "अगर मेरा पुरुष सहयोगी जा सकता है, तो मैं क्यों नहीं? मैं पहले 'कलेक्टर' हूँ, फिर महिला।" उनका वह फैसला आज भी याद किया जाता है। 7. भविष्य का 'कलेक्टर साहिबा' – यूपीएससी की तैयारी कर रही हर लड़की का सपना आज, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों से बेहतर हो रहा है। दिल्ली के राजेंद्र नगर या इलाहाबाद की तैयारी करती हजारों युवतियों के बीच 'कलेक्टर साहिबा' एक सपना है। वे चाहती हैं कि लोग उन्हें सम्मानपूर्वक 'साहिबा' कहें, न कि 'मैडम' या 'बहू जी'। collector sahiba in hindi high quality
जब आप कहते हैं तो यह सुनने वालों में सम्मान, जिज्ञासा और कभी-कभी थोड़ी सी बेचैनी भी पैदा करता है – क्योंकि उन्हें पता है कि वह आई हैं तो काम करके रहेंगी, और इस बार किसी की अनदेखी नहीं होगी। collector sahiba in hindi high quality
अतः अगली बार जब आप किसी जिले की महिला जिलाधिकारी से मिलें, तो उन्हें 'मैडम' कहने से बचें। हिंदी की शान और उनके पद के सम्मान में कहें – लेखक का नोट: यह लेख भारतीय प्रशासनिक सेवा की उन सभी महिला अधिकारियों को समर्पित है, जिन्होंने 'कुर्सी' और 'घर' दोनों को संभालते हुए 'साहिबा' शब्द को उसकी असली इज्जत दिलाई है। collector sahiba in hindi high quality
यह लेख 'कलेक्टर साहिबा' शब्द के इतिहास, इसके सामाजिक और सांस्कृतिक निहितार्थ, तथा यह कैसे भारतीय नौकरशाही में महिलाओं के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक बन गया है, की उच्च-गुणवत्ता वाली विश्लेषणात्मक प्रस्तुति है। अंग्रेजी के 'सर' (Sir) से निकला 'साहिब' शब्द मुगल काल में सम्मानित व्यक्तियों के लिए प्रयुक्त होता था। ब्रिटिश राज में यह आईसीएस (भारतीय सिविल सेवा) अधिकारियों का विशेषण बन गया। आज़ादी के बाद भी, जिलाधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट) या कलेक्टर के लिए 'कलेक्टर साहब' श्रद्धा और अधिकार का शब्द बना रहा।
जब भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में महिलाओं का प्रवेश बढ़ा, तो भाषा ने लचीलापन दिखाया। 'साहब' यानी स्वामी, प्रभु। 'साहिबा' यानी स्वामिनी, प्रभु की पत्नी। लेकिन व्यावहारिक उपयोग में, आज, 'कलेक्टर साहिबा' कहने का अर्थ है – उस अधिकारी को उसके लिंग के कारण कम नहीं, बल्कि उसकी योग्यता और पद के कारण अधिक सम्मान देना। 2. कौन होती हैं 'कलेक्टर साहिबा'? – एक परिचय 'कलेक्टर साहिबा' कोई साधारण महिला पदाधिकारी नहीं होतीं। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी होती हैं, जिन्हें किसी जिले का प्रशासनिक प्रमुख नियुक्त किया गया हो। उनकी जिम्मेदारियां पुरुष कलेक्टरों से कम नहीं, बल्कि अधिक नाजुक हो सकती हैं, क्योंकि उन्हें एक पितृसत्तात्मक समाज अपनी शक्ति की आलोचनात्मक नजर से देखता है।